Saturday, October 13, 2012

हम भी फ़साना कह देंगे


कभी हम भी फ़साना कह देंगे गुज़रा वो ज़माना कह देंगे
रुन्धते से गले नम सी आँखें सब हाल पुराना कह देंगे

जो ज़ख्म पुरानी यादों के फिर से ताज़ा हो जाएँ तो
आँखों से बरसते आंसू को खुशियों का बहाना कह देंगे

फिर घड़ी दो घड़ी ग़म होगा फिर घड़ी दो घड़ी खुशियाँ भी
और रुखसत लेते लम्हों में वादा वो पुराना कह देंगे

झूठी कसमें झूठी रस्में झूठी तारीफों के हमदम
सच का आईना दिखलाया तो हमें लोग बेगाना कह देंगे

यादें साँसें नगमें धड़कन वादे काँटे खंज़र और दिल
तेरी सौगातें बतला दें तो 'तश्ना' को दीवाना कह देंगे

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अनिरुद्ध
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