Monday, January 14, 2013

तुम


धडकनों में गूंजी ज़िन्दगी की सदा हो जैसे,
माँ ने जो मांगी खुशियों की दुआ हो जैसे,

अधखुली पलकों पे सुरमई ख्वाबों सी,
रूह से लिपटी रब की अदा हो जैसे,

कच्चे वादों की पक्की सी डोर से,
बंधती तमन्नाओं की इन्तज़ा हो जैसे,

सजदे में खुदा के दिल से जो निकली,
वो हसरत हो आरज़ू हो वफ़ा हो जैसे,

'तशना' से बेहतर तुम्हें किसने है जाना,
क़ायनात की सलामती की इक्तिज़ा हो जैसे.
--
अनिरुद्ध
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Saturday, January 12, 2013

राजमा-चावल


हंसी की धीमी आंच पे,
थोडा हिलाकर थोडा डुलाकर,
चुनिन्दा खयालातों का शोख रस मिलाकर,
एक कड़ाही शोरबे की तैयार की तुमने,
फिर दिल की सारी दुआओं के मसाले भूने,
और-
अपनी मुहब्बत की खुशबू से महकी,
कुछ हरी मिर्च की कतरने भी डाली,
कुछ देर यूँ ही जज़बातों के साथ,
लौ में पकाया

क्या खूब स्वाद बने हैं,
तेरे राजमा-चावल स्वीटो.
--
अनिरुद्ध
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तुम्हारी ख़ातिर


शब्दों का मायाजाल नहीं,
भाषा हो मौन की,
और बातें तुम्हारे मेरे प्यार की,
जज़्बात-
जो बेज़ारी की कब्र में दफ़न हैं कहीं,
उन्हें मिले जहाँ एक नयी ज़िन्दगी,
ऐसा एक संसार बनाना है मुझे,
तुम्हारी ख़ातिर,
ग़मों की धूप नहीं,
छाया हो मुहब्बत की,
और ठंडक तुम्हारे आँचल की,
मासूमियत-
जो बनावट के पैरों तले दब गयी हैं कहीं,
उसे मिले जहाँ एक नयी रवानी,
ऐसा एक दिल बनाना है मुझे,
तुम्हारी ख़ातिर.
--
अनिरुद्ध
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मुहब्बत


ख़ामोश आवाजें सुनोगे तो मुहब्बत समझ में आयेगी,
भीड़ में तन्हा रहोगे तो मुहब्बत समझ में आयेगी,

लफ़्ज़ों का हमेशा कोई मतलब नहीं होता,
बेमाने लफ्ज़ पढ़ोगे तो मुहब्बत समझ में आयेगी,

ज़ुबां से हर बात कहना रिश्तों में नहीं लाज़मी,
निगाहों से बात करोगे तो मुहब्बत समझ में आयेगी,

दीवाने दुनियां में तुम्हे और भी मिलेंगे,
'तशना' को याद करोगे तो मुहब्बत समझ में आयेगी.
--
अनिरुद्ध
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कुछ रिश्ते अनजाने से


कुछ रिश्ते अनजाने से, अनछुए दीवाने से,
कच्चे धागों में लिपटे से,
मन के भावों में सिमटे से,
हम मिलकर भी बेगाने से,
कुछ रिश्ते अनजाने से,

कुछ कह कर चुप रह जाने से,
चुप रह कर सब कह जाने से,
किस्सों और फ़साने से,
कुछ रिश्ते अजनाने से,

आँखों के पैमाने से,
खुशियों के मयखाने से,
साँसों के आने जाने से,
कुछ रिश्ते अनजाने से, अनछुए दीवाने से.
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अनिरुद्ध
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